श्रीविष्णु सहस्रनाम स्तोत्रम् - जन्म नक्षत्र श्लोक्

रचयिता: व्यास महर्षि

श्रीश्रीश्री त्रिदंडि चिन्नश्रीमन्नारायण रामानुज जीयर स्वामीजी की दिव्य वाणी से

जन्मनक्षत्र:
  अश्वनि
  भरणि
  कृत्तिक
  रोहिणि
  मृगशिर
  आरुद्र
  पुनर्वसु
  पुष्यमि
  आश्लेष
  मख
  पुब्ब
  उत्तर
  हस्त
  चित्त
  स्वाति
  विशाख
  अनूराध
  ज्येष्ठ
  मूल
  पूर्वाषाढ
  उत्तराषाढ
  श्रवणं
  धनिष्ठ
  शतभिषं
  पूर्वाभाद्र
  उत्रराभाद्र
  रेवति
   पाद: